KHATUSHYAMJIKA , Dist. Sikar, 332602, Rajasthan

खाटू श्याम जी मंदिर और बारबरीक की पूरी कथा

खाटू श्याम जी मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है, जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यहाँ पर लाखों श्रद्धालु हर साल भगवान खाटू श्याम की पूजा करने आते हैं। यह मंदिर खासतौर पर बारबरीक, जो महाभारत के महान योद्धा भीम के पोते और गांधारी के पुत्र अश्वत्थामा के पौत्र थे, की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। खाटू श्याम जी का नाम और उनकी पूजा बारबरीक के बलिदान और कृष्ण के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा से जुड़ी हुई है।

बारबरीक का जन्म और शक्ति

बारबरीक का जन्म बहुत ही चमत्कारी परिस्थितियों में हुआ था। उनकी माता का नामवाज्रवती था, जो एक शक्तिशाली और तेजस्वी महिला थीं। बारबरीक को भगवान शंकर और देवी पार्वती से बहुत बड़े वरदान प्राप्त थे। उन्हें तीन विशेष तीर मिले थे, जिनसे वह किसी भी युद्ध को आसानी से जीत सकते थे। यह तीर इतनी शक्तिशाली थे कि बारबरीक द्वारा छोड़ा गया एक तीर पूरी सेना को नष्ट कर सकता था। इसके अलावा, बारबरीक के पास एक विशेष क्षमता थी कि वह अपनी आँखों से किसी भी युद्ध की स्थिति का आकलन कर सकते थे और उसी के अनुसार उस युद्ध को जीतने के लिए तीर चलाते थे। बारबरीक का दिल भगवान श्री कृष्ण के प्रति बहुत श्रद्धा से भरा हुआ था, और वह हमेशा कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। वे भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए तत्पर रहते थे और उनकी पूजा करते थे।

महाभारत का युद्ध और बारबरीक का धर्म

महाभारत के युद्ध के दौरान, बारबरीक ने पांडवों की ओर से युद्ध में भाग लेने का फैसला किया। वह कृष्ण से मिले और उन्हें कहा कि वह युद्ध में सिर्फ उस पक्ष का साथ देंगे जो हार रहा होगा। भगवान कृष्ण ने यह देखा और समझा कि बारबरीक की शक्ति से युद्ध का संतुलन बिगड़ सकता है। कृष्ण ने बारबरीक से यह पूछा कि वह किस पक्ष का साथ देंगे, और बारबरीक ने कहा कि वह हमेशा उस पक्ष का साथ देंगे जो हार रहा हो। यह सुनकर कृष्ण ने बारबरीक की निष्ठा और भक्ति को सराहा।

कृष्ण ने बारबरीक को एक उपहार दिया, जिसमें वह उन्हें अपना चमत्कारी और शक्तिशाली तीर देंगे, जिससे वह किसी भी युद्ध में विजय प्राप्त कर सकते थे। लेकिन भगवान कृष्ण ने बारबरीक से एक और सवाल किया, जो उन्हें सबसे कठिन था। कृष्ण ने बारबरीक से कहा कि वह अपने सिर को भगवान कृष्ण के चरणों में समर्पित करें और इसे उनकी इच्छा के अनुसार त्याग दें।

बारबरीक का बलिदान

बारबरीक, जिन्होंने हमेशा भगवान कृष्ण की भक्ति में आत्मसमर्पण किया था, कृष्ण के आदेश को स्वीकार किया। कृष्ण ने बारबरीक का सिर काटकर एक पहाड़ी पर रख दिया। यह वह स्थान था, जहां बाद में खाटू श्याम जी मंदिर का निर्माण हुआ। भगवान कृष्ण ने बारबरीक के सिर को श्याम के रूप में पूजा करने का आदेश दिया, और उन्हें आशीर्वाद दिया। कृष्ण ने यह निर्णय लिया कि बारबरीक की पूजा सदा होगी, क्योंकि उनकी भक्ति और बलिदान एक अद्वितीय उदाहरण है।

खाटू श्याम जी मंदिर का इतिहास

खाटू श्याम जी मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है। यह मंदिर विशेष रूप से बारबरीक के बलिदान और उनकी भक्ति को समर्पित है। यहां पर भगवान श्याम की पूजा की जाती है, जो भगवान कृष्ण का ही रूप है। यह मंदिर खाटू श्याम जी की पूजा करने के लिए एक प्रमुख स्थल बन चुका है। यहां पर भक्त अपने जीवन के सभी कष्टों और समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते हैं।

मंदिर की विशेषता

खाटू श्याम जी मंदिर में भगवान श्याम की पूजा अर्चना की जाती है। भक्त विशेष रूप से मंगलवारऔर शनिवार को यहां आते हैं क्योंकि ये दिन भगवान श्याम के लिए अत्यधिक शुभ माने जाते हैं। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है। मंदिर में भक्तश्याम बाबाकी मूर्ति का दर्शन करते हैं और अपने दुखों का निवारण करने की प्रार्थना करते हैं।

मंदिर में पूजा विधि

मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को विशेष पूजा विधि का पालन करना होता है। यह पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। भक्तश्याम बाबा की पूजा करते हैं, नारियल चढ़ाते हैं और उनकी मूर्ति के सामने श्रद्धा से सिर झुका कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यहां पर कुछ लोगमाला चढ़ाना, प्रसाद चढ़ाना, और मनौती मांगने आते हैं। खाटू श्याम जी का दर्शन करने से भक्तों को मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

मंदिर के समय (Temple Timings)

प्रभात आरती
4:30 AM से 6:00 AM तक
दोपहर आरती
12:00 PM से 1:00 PM तक
शाम आरती
7:00 PM से 8:00 PM तक

इसके अतिरिक्त, मंदिर में भक्तों के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन मंदिर में भारी भीड़ होती है, क्योंकि यह दिन हनुमान जी के लिए अत्यधिक शुभ माने जाते हैं।

खाटू श्याम जी मंदिर तक पहुँचने का मार्ग

  1. रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन खाटू श्याम रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशन सीकरऔर जयपुर हैं, जहां से आप टैक्सी या ऑटो द्वारा मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
  2. सड़क मार्ग: खाटू श्याम जी मंदिर जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है। यह सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है और जयपुर, दिल्ली, और आसपास के शहरों से बस या टैक्सी के द्वारा आसानी से पहुँच सकते हैं।
  3. वायु मार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा खाटू श्याम जी मंदिर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है। हवाई अड्डे से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा आप मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

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विशेष अवसर

  • बसंत पंचमी: इस दिन विशेष रूप से खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों की भीड़ होती है। इस दिन भगवान श्याम की पूजा बहुत धूमधाम से की जाती है।
  • मंगलवार और शनिवार: यह दिन भगवान श्याम के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं, और इन दिनों मंदिर में विशेष पूजा आयोजित की जाती है।
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